जमशेदपुर: जुलाई माह को विश्वभर में सारकोमा जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) के मेडिकल इंडोर सर्विसेज विभाग के एसोसिएट स्पेशलिस्ट डॉ. आयुष चौधरी ने कहा कि सारकोमा एक दुर्लभ लेकिन गंभीर कैंसर है, जिसकी समय पर पहचान और उपचार से मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।


उन्होंने बताया कि सारकोमा शरीर के कनेक्टिव टिश्यू जैसे मांसपेशियों, वसा, नसों, रक्त वाहिकाओं और हड्डियों में विकसित होने वाला कैंसर है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती लक्षण सामान्य गांठ या सूजन जैसे लगते हैं, जिसके कारण लोग इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि शरीर में कोई गांठ लगातार बढ़ रही हो, उसका आकार पांच सेंटीमीटर से अधिक हो या हड्डियों में लगातार दर्द बना रहे, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
डॉ. चौधरी ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, उन्नत सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी की मदद से अब सारकोमा का उपचार पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो गया है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का इलाज ऐसे विशेषज्ञ केंद्रों में होना चाहिए, जहां मल्टीडिसिप्लिनरी टीम उपलब्ध हो। उन्होंने लोगों से अपील की कि जागरूक रहें और किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें।

